Young girl smiling in class Close up head shot of boy in school Girl holding hand up, with teacher at white board
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जोर-जबरदस्ती (Bullying)

जोर-जबरदस्ती किसी बच्चे के स्कूल में उपस्थित न होने का कारण हो सकता है। माता-पिता के रूप में आपको जानकारी होनी चाहिए कि यदि आपको पता चलता है कि आपके बच्चे के साथ जोर-जबरदस्ती हो रही है/हुई है या वह जोर-जबरदस्ती का व्यवहार प्रदर्शित कर रहा है, तो इस पर कैसे प्रतिक्रया देनी है।

 

जोर-जबरदस्ती क्या है?

 

क्या विभिन्न प्रकार की जोर-जबरदस्ती होती है?

 

जोर-जबरदस्ती के चिह्न और लक्षण क्या हैं?

 

जोर-जबरदस्ती के व्यवहार की क्या विशेषताएं हैं?

 

जोर-जबरदस्ती कहां होती है?

 

जोर-जबरदस्ती क्यों होती है?

 

मैं जोर-जबरदस्ती को कैसे संभाल सकती/सकता हूं?

 

स्कूल की जिम्मेदारी क्या है?

 

जोर-जबरदस्ती की रोकथाम के लिए स्कूल क्या कार्रवाई कर सकता है?

 

स्कूल के द्वारा जोर-जबरदस्ती से पीड़ितों को क्या समर्थन / सहायता दी जा सकती है?

 

स्कूल के द्वारा जोर-जबरदस्ती से पीड़ितों को क्या समर्थन / सहायता दी जा सकती है?

 

यदि मैं स्कूल की प्रतिक्रिया से नाखुश हूं, तो मैं क्या कर सकता हूं?

 

और क्या सहायता उपलब्ध है?

 

 जोर-जबरदस्ती क्या है?

यह किसी को आघात पहुंचाने, धमकाने या डराने की जानबूझकर, चेतना से की गई इच्छा है। शिक्षा विभाग (डीई) जोर-जबरदस्ती की परिभाषा इस रूप में करता है “

स्कूल का कार्य अपने सभी शिष्यों को सर्वोत्तम मानक की शिक्षा प्रदान करना है। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सुरक्षित और रक्षित वातावरण अनिवार्य है। जोर-जबरदस्ती अनिश्चितता, गोपनीयता और भय के वातावरण में फलती-फूलती है और अपनी प्रकृति से यह शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करती है और मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाती है। इसलिए यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर स्कूल और स्थानीय सामुदायिक अभिकरणों के द्वारा सकारात्मक और मजबूत ढंग से काम होना चाहिए।

 

जोर-जबरदस्ती न केवल उन्हें प्रभावित करती है, जो इसमें तात्कालिक रूप से शामिल होते हैं – बल्कि यह कक्षा में सभी को प्रभावित करती है, स्कूल समुदाय को और अंततः व्यापक समुदाय को। यदि जोर-जबरदस्ती की पहचान और उस पर उपयुक्त तरीके से कार्रवाई करनी हो, तो उच्च स्तर की समग्र निगरानी की जरूरत है।

 

क्या विभिन्न प्रकार की जोर-जबरदस्ती होती है?

जोर-जबरदस्ती में बहुत विस्तृत श्रेणी की गतिविधियां शामिल होती हैं: -

 

1. शिष्यों का व्यवहार

 

(i) शारीरिक आक्रामकता:

इसमें धकियाना, फेंकना, ठोकर मारना और मुक्का मारना शामिल है – यह गंभीर शारीरिक आक्रमण का रूप भी ले सकती है। चरम मामलों में चाकू जैसे हथियारों का प्रयोग भी किया जा सकता है। यह व्यवहार अकसर लड़कियों की तुलना में लड़कों के बीच अधिक होता प्रतीत होता है।

 

(ii) मौखिक:

यहां हथियार के रूप में वाणी का प्रयोग किया जाता है। यह उसी व्यक्ति (व्यक्तियों) को लगातार चिढ़ाने का रूप ले सकता है, जिससे शर्मिंदगी, दुख या अपमान हो। यह जोर-जबरदस्ती पीड़ित के साथ अकसर शारीरिक स्वरूप, शैली या विशिष्ट ध्वनि विशेषताओं और उच्च और निम्न दोनों उपलब्धियों की शैक्षिक योग्यता के ज्ञात अंतर के कारण की जाती है। चिढ़ाना शिष्य के सेक्स-संबंधी विचारों पर सुझावपरक टिप्पणियों का रूप भी ले सकता है। (अज्ञात फोन कॉल करना मौखिक जोर-जबरदस्ती का आम रूप है, जिसमें बच्चे और निश्चित रूप से अध्यापक शिकार हो सकते हैं।

 

(iii) धमकानाः

यह बहुत आक्रामक शरीर भाषा और वाणी के सुर के प्रयोग आधारित है, जहां पीड़ित पर ऐसा कुछ करने के लिए दबाव डाला जा सकता है, जो वह न करना चाहे। जोर-जबरदस्ती करने वाले के चेहरे के भाव या “रूप”आक्रामकता और/या नापसंद दर्शा सकते हैं। पीड़ित के आत्म-विश्वास को कम करने के लिए धमकियों का निरंतर प्रयोग किया जाता है।

 

(iv) बहिष्कार:

यह काम आम तौर से जोर-जबरदस्ती करने वाला शुरू करती/करता है। पीड़ित को कुछ या पूरे कक्षा समूह द्वारा उद्देश्य से अलग-थलग, बाहर या उपेक्षित किया जाता है। इसे नोट घुमाकर, अपमानजनक बातें फुसफुसाकर जिसे पीड़ित सुन सके या श्याम पट्ट पर या सार्वजनिक स्थानों पर अपमानजनक टिप्पणियां लेखकर सघन किया जा सकता है।

 

(v) उत्पीड़न:

पैसा मांगा जा सकता है और यदि पीड़ित तत्काल नहीं देती/देता, तो उसे धमकाया जा सकता है। पीड़ित के लंच, डिनर टिकट या लंच का पैसा लिया जा सकता है। पीड़ित पर जोर-जबरदस्ती करने वाले के लिए संपत्ति चुराने के लिए जोर दिया जा सकता है। ऐसे तरीकों का प्रयोग पीड़ित को केवल अपराध भाव में डालने के लिए किया जा सकता है।

 

(vi) संपत्ति को नुकसान:

जोर-जबरदस्ती करने वाला पीड़ित की संपत्ति पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप कपड़े, स्कूल की किताबें या अन्य निजी संपत्ति को खराब, चुराया या छिपाया जा सकता है।

 

2. प्रौढ़ व्यवहार

 

अनजाने में या अन्यथा, स्कूल की स्थिति में कोई प्रौढ़ जोर-जबरदस्ती के व्यवहार को निम्नलिखित के द्वारा उत्तेजित या प्रबल कर सकती/सकता हैः -

 

(i) ऐसे शिष्य को शर्मिंदा करना, जो शैक्षिक रूप से कमजोर/असाधारण या अन्य तरीकों से असुरक्षित हो।

(ii) शिष्य की शारीरिक स्वरूप या पृष्ठभूमि के बारे में कटाक्ष/नकारात्मक टिप्पणियों का प्रयोग करना।

(iii) ऐसे मुद्राओं या अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना जो डराने और धमकाने वाली हों।

 

जोर-जबरदस्ती के चिह्न और लक्षण क्या हैं?

हालांकि पीड़ित अकसर मौन रहते हैं, लेकिन मूड और व्यवहार में बदलाव उनकी पीड़ा का संकेत कर सकता है। जोर-जबरदस्ती के पीड़ित जोर-जबरदस्ती करने वाले द्वारा प्रयोग की जाने वाले बल से असहाय और नियंत्रित महसूस करते हैं। इससे असुरक्षा, और अधिक डर, विश्वास खोना और परिणामस्वरूप आत्म-सम्मान में कमी हो जाती है। इसलिए, पीड़ित और अधिक असुरक्षित हो जाता है। चरम मामलों में, जोर-जबरदस्ती के कारण आत्महत्या हो सकती है। किसी भी व्यवहार-संबंधी बदलाव के मामले में निगरानी महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआत में हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है।

 

जोर-जबरदस्ती का शिकार शिष्य निम्नलिखित में से कुछ चिह्न और लक्षण प्रदर्शित कर सकता हैः

 

  • शारीरिक बीमारी का नमूना जैसे पेट दर्द, सिरदर्द।

  • स्कूल आने-जाने के बारे में आशंका; स्कूल ले जाए जाने और वहां से ले आने की इच्छा करना, आने-जाने के नियमित समय की उपेक्षा करना।

  • प्रृवत्ति और/या व्यवहार में बदलाव।

  • आशंका या निराशा के चिह्न – सोने में कठिनाई, भोजन न करना, रोना, बिस्तर गीला करना, दुःस्वप्न, हकलाना, अंतर्मुखी या अमैत्रीपूर्ण बनना।

  • चीजें और/या कपड़ों को नुकसान या उनका गायब होना।

  • पैसे की ज्यादा मांग करना, और/या चुराना।

  • बिना स्पष्टीकरण के शरीर पर खरोंचें या कटने के चिह्न।

  • शैक्षिक निष्पादन खराब होना या स्कूल में उत्साह और रुचि खोना।

  • यह बताने में हिचकना और/या मना करना कि उसे क्या परेशान कर रहा है।

  • खुद को नुकसान पहुंचाना और आत्महत्या की कोशिश।

 

व्यक्तिगत रूप से, ये चिह्न और लक्षण अनिवार्यतः यह नहीं बताते कि शिष्य के साथ जोर-जबरदस्ती हो रही है। तथापि, यदि ये कुछ साथ-साथ हों या इनका दोहराव हो, तो यह तय करने के लिए और छानबीन की जरूरत होगी कि शिष्य को क्या प्रभावित कर रहा है।

 

जोर-जबरदस्ती के व्यवहार की क्या विशेषताएं हैं?

जोर-जबरदस्ती लगातार होती है और यह प्रमुख रूप से गुप्त गतिविधि है।

 

किसी भी बच्चे के साथ उसकी खुद के किसी गलती के बिना जोर-जबरदस्ती हो सकती है। हाल ही के अध्ययनों ने संकेत किया है कि सभी स्कूली बच्चों में से 20 प्रतिशत तक जोर-जबरदस्ती के व्यवहार से प्रभावित होते हैं।

 

पीड़ित को भिन्न रूप में देखा जाता है। वह संवेदनशील, भावुक, निष्क्रिय ‘अकेला’, – सामाजिक या शैक्षिक रूप से सफल, या घर पर दुर्व्यवहार का शिकार, या भिन्न नस्ल/संस्कृति/धर्म/सेक्स-संबंधी विचारों आदि की/का हो सकती/सकता है।

 

सामान्य गतिविधियों में, शिष्य एक दूसरे को चिढ़ा या फब्ती कस सकते हैं। तथापि, एक समय आता है जब यह जोर-जबरदस्ती के व्यवहार में विकसित हो सकता है। इसकी गंभीरता और अवधि सीधे रूप में पीड़ित की मौखिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक आक्रामकता पर प्रतिक्रिया से संबंधित है।

 

जोर-जबरदस्ती के शिकार भोले-भाले होते हैं, तथापि कुछ शिष्य अनजाने में इस ढंग से व्यवहार कर सकते हैं कि वे जोर-जबरदस्ती के व्यवहार को आकर्षित करें।

 

यह आम तौर से स्वीकार किया जाता है कि जोर-जबरदस्ती सीखा गया व्यवहार होता है, जिसे कोई व्यक्ति या समूह कर सकता है।

 

जोर-जबरदस्ती करने वाला अकसर असुरक्षित, कम आत्म-सम्मान वाला कम उपलब्धि वाला, शक्ति चाहने वाला, दिखावे वाला, ईर्ष्यालु और अपने सहपाठियों की तुलना में कम अभिप्रेरित हो सकती/सकता है। हो सकता है कि उसमें अपराध-बोध न हो, और वह खुद को भरोसा दे सकती/सकता है कि पीड़ित जोर-जबरदस्ती के व्यवहार के ही काबिल है।

 

यह महत्वपूर्ण है कि स्कूल इस बात को समझे कि कोई भी शिष्य जोर-जबरदस्ती के व्यवहार का शिकार, या करने वाला हो सकता है।

 

जोर-जबरदस्ती कहां होती है?

स्कूल में जोर-जबरदस्ती अकसर अ-संरचित समय के दौरान होती है, उदाहरण के लिए, अवकाश या दोपहर के भोजन के समय। जोर-जबरदस्ती करने वाले उस स्थिति में अपने शिकार का लाभ उठा लेते हैं, जब उनके व्यवहार की जांच करने के लिए किसी प्रौढ़ का नियंत्रण नहीं होता।

अनुसंधानों ने दिखाया है कि ज्यादातर जोर-जबरदस्ती खेल के मैदान में होती है।

 

इसके अनेक कारण हो सकते हैं:

  • अपर्याप्त निरीक्षण;

  • रचनात्मक खेल और खेलने के क्षेत्रों की कमी;

  • छिपे हुए क्षेत्र असामाजिक व्यवहार को छिपा देते हैं;

  • बच्चे अपने शिकार के विरुद्ध टोली बना लेते हैं;

  • शोर का स्तर ऊंचा होता है और छिपा सकता है कि क्या हो रहा है;

  • शारीरिक प्रकृति के खेल;

  • शिष्यों की आयु की विस्तृत श्रेणी, जिसके परिणामस्वरूप छोटे बच्चे असुरक्षित हो जाते हैं।

 

जोर-जबरदस्ती के अवसर वाले अन्य क्षेत्रों में शामिल हैं: - शौचालय, क्लोकरूम, लॉकर क्षेत्र, गलियारे, स्नानघर, कपड़े बदलने के कमरे और स्कूल बसें। जोर-जबरदस्ती की घटनाओं में कमी लाने के लिए नजदीकी निरीक्षण जरूरी है।  जोर-जबरदस्ती कक्षा में भी हो सकती है। यहां अध्यापक/अध्यापिका स्थायित्व और सुरक्षा का वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता/निभाती है। शिष्यों को मौखिक या शारीरिक दुर्व्यवहार करने से हतोत्साहित करना चाहिए, चाहे वह कितना ही हल्का हो। इसी तरह खुद अध्यापकों को अपमानजनक और कटाक्ष वाली भाषा का प्रयोग या कोई शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए।

 

स्कूल आना-जाना असामाजिक व्यवहार का अन्य अवसर देता है।

 

यह समझना महत्वपूर्ण है कि जोर-जबरदस्ती स्कूल के वातावरण के बाहर भी होती है। यह समस्या अकसर युवाओं के सामाजिक जीवन पर बुरा असर डाल सकती है और यह युवा संगठनों आदि के भीतर हो सकती है।

 

जोर-जबरदस्ती क्यों होती है?

जोर-जबरदस्ती के कारण जटिल और विविध हैं। ज्यादा आम कारणों में से कुछ निम्नलिखित हैं: -

  • झूठा दृष्टिकोण कि आक्रामक व्यवहार स्वीकार्य है;

  • दोस्तों और सहपाठियों के सामने दर्जा हासिल करना;

  • महत्वपूर्ण वयस्कों का ध्यान प्राप्त करना;

  • ऊब;

  • उत्पीड़न;

  • शैक्षिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में असफलताओं की और माता-पिता के दबाव की भरपाई करना;

  • जोर-जबरदस्ती का व्यवहार बच्चे के साथ दुर्व्यवहार/उपेक्षा के शिकार का संकेत भी हो सकता है।

 

मैं जोर-जबरदस्ती को कैसे संभाल सकती/सकता हूं?

  • चिह्नों या लक्षणों को नजरअंदाज मत कीजिए

  • मामले को अपने खुद के हाथों में न लें

  • अपने बच्चे से बात करें/उसे सुनें और मामले को गंभीरता से लें

  • आपको जो विवरण या सूचना दी गई है, उसे लिख लें

  • ऐसा कोई प्रमाण रखें, जो यह साबित कर सके कि क्या हो रहा है। उदाहरण के लिए, पाठ संदेश, लेख, ई-मेल आदि

  • सुनिश्चित कर लें कि आपके बच्चे को तत्काल कोई खतरा नहीं है

  • जल्दी से जल्दी चिंता पर चर्चा के लिए बैठक की व्यवस्था के लिए स्कूल से संपर्क करें

  • यदि आपको कुछ सहायता चाहिए, तो किसी मित्र या रिश्तेदार को साथ लाएं

  • शांत बने रहें और अपनी चिंताओं को स्पष्ट और तार्किक ढंग से रखने की कोशिश करें।

 

स्कूल की जिम्मेदारी क्या है?

अपने स्कूल के सभी बच्चों के कल्याण का प्रोत्साहन और रक्षा करना संचालकों के बोर्ड की कानूनी जिम्मेदारी है। उनके कर्तव्य शिक्षा और पुस्तकालय (एनआई) आदेश 2003 धारा 17, 18 और 19 में निर्धारित किए गए हैं। उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि शिष्यों को अपना शैक्षिक संभावना पूरी करने के लिए सभी मुनासिब कदम उठाए गए हैं।

 

जोर-जबरदस्ती पर पूरे स्कूल की नीति विकसित और लागू करने में प्रधानाचार्य का नेतृत्व महत्वपूर्ण है। ऐसी नीति स्कूल के कर्मचारियों, शैक्षिक और गैर-शैक्षिक, से मिलकर और माता-पिता और शिष्यों से परामर्श से विकसित करनी चाहिए। युवा कार्यकर्ता स्कूल वातावरण से बाहर जोर-जबरदस्ती के निरंतर प्रमाण दे सकते हैं।

 

सभी संबंधित लोगों को नीति के लक्ष्यों, भूमिकाओं और उद्देश्यों को साफ़ तौर से समझ लेना चाहिए।

 

जोर-जबरदस्ती की रोकथाम के लिए स्कूल क्या कार्रवाई कर सकता है?

जोर-जबरदस्ती पर स्कूल की नीति तब सर्वाधिक प्रभावी होती है, जब वह देखभाल के वातावरण में शुरू की जाती है और अन्य लोगों के प्रति सम्मान को शैक्षिक देखभाल प्रणाली के भाग के रूप में देखा जाता है। यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि स्कूल में जोर-जबरदस्ती का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। शिष्यों को घटनाओं की रिपोर्ट देने और अन्य शिष्यों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कर्मचारी सकारात्मक भूमिका के आदर्श बनकर, सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।

1. जागरूकता बढ़ाना (उदाहरण)

 

(i) जोर-जबरदस्ती पर नीति स्कूल की अनुशासन नीति का भाग होनी चाहिए।

(ii) यह लिखी जानी चाहिए और सभी को उपलब्ध होनी चाहिए।

(iii) संचालकों को समूची स्कूल नीति के विकास और अनुपालन पर नजर रखनी चाहिए।

(iv) कर्मचारी जागरूकता दिवस पहले आयोजित की जाने वाली कार्यशालाओं में से होना चाहिए।

(v) इसके बाद शिष्य जागरूकता दिवस हो सकता है जैसे पोस्टर, प्रश्नावलियां आदि।

(vi) माता-पिता अध्यापक संघ (पीटीए) द्वारा आयोजित एक शाम स्कूल को माता-पिता को शामिल करने का अवसर प्रदान कर सकती है।

(vii) सामुदायिक जागरूकता के लिए कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है, जैसे नर्स/चर्च, पुलिस/युवा समूहों के साथ।

शिष्यों के बीच जागरूकता बढ़ाने में पाठ्यचर्या गतिविधियां मूल्यवान भूमिका निभा सकती हैं, जैसे अंग्रेजी; नाटक; सामाजिक अध्ययन; पीई; स्वास्थ्य शिक्षा; स्कूल एसेंब्ली; ईएमयू और किडस्केप/सुरक्षित रहें कार्यक्रम।

 

2. निरीक्षण

 

(i) जोर-जबरदस्ती के संभावित स्थलों का नजदीकी से निरीक्षण।

(ii) वरिष्ठ शिष्य जिम्मेदारी ले सकते हैं।

(iii) सुनिश्चित करें कि स्कूल के सभी कर्मचारियों (खास तौर से, गैर-शैक्षिक कर्मचारियों) के पास अपने कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण और अधिकार हैं।

(iv) स्कूल की नीति के बारे में बस कंपनियों से संपर्क करें।

(v) लंच का समय ‘फैला दें’ , यानी, सभी बच्चों को एक ही समय भोजनावकाश न देकर, अलग-अलग समयों पर दी जाए।

(vi) पहले साल के शिष्यों के लिए ‘अवकाश क्षेत्र’ रखें।

(vii) घंटी का समय ‘फैला दें’. स्कूल के आसपास का समय कम कर दें।

(viii) खेल के मैदान को छोटे-छोटे खेलने के क्षेत्रों में बांट दें।

(ix) कनिष्ठ और वरिष्ठ विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग शौचालय रखें।

(x) सकारात्मक खेल – संभवतः स्वयंसेवकों द्वारा निरीक्षित।

 

3. अभिलेखन विधि

 

(i) जोर-जबरदस्ती की सभी घटनाओं के अभिलेखन के लिए एक अभिलेखन कार्य-प्रणाली होनी चाहिए। (मानक प्रपत्र वांछनीय होंगे)

(ii) चालू /या गंभीर मामलों में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा विस्तृत सूची लेखा रखा जाना चाहिए।

(iii) गंभीर घटनाओं को रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

(iv) शामिल बच्चों के माता-पिता को जानकारी देनी चाहिए, जिससे कि वे अपने बच्चे और स्कूल की सहायता कर सकें।

(v) माता-पिता को उपयुक्त व्यक्ति की जानकारी होनी चाहिए, जिससे वे जोर-जबरदस्ती की किसी ज्ञात घटना के बारे में संपर्क कर सकें।

(vi) किसी चोट का फोटोचित्र लेना चाहिए। यदि मामला गंभीर हो, तो पुलिस को सूचित करें।

स्कूल के द्वारा जोर-जबरदस्ती से पीड़ितों को क्या समर्थन / सहायता दी जा सकती है?

  • पीड़ित और माता-पिता को आश्वासन दें कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और उस पर कार्रवाई की जाएगी।

  • पीड़ित से जल्दी से जल्दी मिलें। जो हुआ है, उसका लिखित रिपोर्ट देने के लिए कहें। यदि जरूरी हो, तो मार्गदर्शन करें – घटना कहां/क्या/कब हुई?

  • स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के लिए गवाहों से अलग-अलग मिलने की कोशिश करें।

  • यदि घटना फिर हो, तो पीड़ित को खुद की रक्षा की नीति और प्रतिक्रिया करने की योजना बनाने में मदद करें।

  • पीड़ित से दोस्ती करें। बड़े बच्चे से दोस्ती करने या “छाया” बनने के लिए कहें।

  • आत्म-विश्वास पुनर्स्थापित करने के लिए पाठ्यचर्या का प्रयोग करें जैसे नाटक, कविता, वीडियो, किडस्केप कार्यक्रम आदि।

  • कार्रवाई पर सहमत हों – जैसे जोर-जबरदस्ती करने वाले से मिलें और उसे बताएं कि यह व्यवहार अस्वीकार्य है।

  • समीक्षा तिथिः स्थिति की समीक्षा के लिए सहमति की छोटी अवधि में पीड़ित से मिलने की व्यवस्था करें।

  • अन्य अभिकरण को संभावित संदर्भ – जैसे मनोवैज्ञानिक, क्लिनिकीय चिकित्सा अधिकारी, शिक्षा कल्याण, युवा सेवा।

 

स्कूल के द्वारा जोर-जबरदस्ती से पीड़ितों को क्या समर्थन / सहायता दी जा सकती है?

  • जोर-जबरदस्ती करने वाले और माता-पिता से जल्दी से जल्दी मिलें। जो हुआ है, उसका लिखित रिपोर्ट देने के लिए कहें। (कहां, क्या और कब)

  • इस बात पर बल दें कि व्यवहार न कि शिष्य अस्वीकार्य है।

  • व्यवहार के स्वीकार्य रूपों का सुझाव दें और ऐसे किसी अच्छे रूप को रेखांकित करें, जो शिष्य ने पहले ही दिखाया हो।

  • किसी हानि/आघात/नुकसान की जिम्मेदारी जोर-जबरदस्ती करने वाले द्वारा अवश्य स्वीकार और भरपाई की जानी चाहिए।

  • स्वीकार्य व्यवहार को रेखांकित करने के लिए पाठ्यचर्या का प्रयोग करें। निजी और सामाजिक शिक्षा, अवधि बनाएं, नाटक।

  • अन्य अभिकरणों से संपर्क करें – शैक्षिक मनोविज्ञान; क्लिनिकीय चिकित्सा अधिकारी; सामाजिक सेवाएं; किशोर इकाई; युवा सेवा।

  • कार्रवाई पर सहमत हों: जोर-जबरदस्ती करने वाले को बता दें कि व्यवहार की निकटता से निगरानी की जाएगी।

  • समीक्षा तिथिः जोर-जबरदस्ती करने वाले से छोटी अवधि में मिलने की व्यवस्था करें, क्योंकि उसे सकारात्मक व्यवहार के बारे में सहायता की जरूरत हो सकती है।

  • अन्य अभिकरण को संभावित संदर्भ, जहां उपयुक्त हो।

 

यदि मैं स्कूल की प्रतिक्रिया से नाखुश हूं, तो मैं क्या कर सकता हूं?

जोर-जबरदस्ती प्राथमिक/प्राथमिक पश्चात शिक्षा दोनों में चिंता का विषय बनती जा रही है।

आशा की जाती है कि स्पष्ट नीति दस्तावेज और सभी शामिल पेशेवरों की पूर्ण वचनबद्धता, समूचे समुदाय में जागरूकता और समझ बढ़ाने का काम करेगी, और इस तरह इस समस्या का हल करने में मदद करेगी।

 

कार्य-प्रणाली से नाखुश माता-पिताओं को पहले पहल यह करना चाहिएः -

 

  • अपनी चिंता पर चर्चा के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से संपर्क करें। यदि असंतुष्ट हों, तो

  • स्कूल के संचालक बोर्ड के अध्यक्ष से संपर्क करें

  • शिक्षा और पुस्तकालय बोर्ड की शिक्षा कल्याण सेवा से संपर्क करें।

  • किसी अन्य अभिकरण से स्वतंत्र सलाह लें उदाहरण के लिए बाल कानून केंद्र

 

और क्या सहायता उपलब्ध है?

 

 

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